
सलूणी (चंबा)। सरकार ने उद्यान केंद्र तो खोल दिए हैं, लेकिन उनमें स्टाफ की तैनाती नहीं की। ऐसे में विकास खंड सलूणी के चार उद्यान केंद्रों पर ताला लगा हुआ है। ये केंद्र पिछले करीब पांच वर्ष से बंद पड़े हुए हैं। इस कारण सैकड़ों बागवानों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब पांच साल पहले सलूणी के मैड़ा, किलोड़, बरंगाल और तेलका में उद्यान केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इनमें न तो उद्यान प्रसार अधिकारी की नियुक्ति की गई और न ही अन्य स्टाफ की। ऐसे में यह केंद्र बंद पड़े हुए हैं। यहीं नहीं उद्यान अधिकारी को भी सलूणी व बनीखेत दो कार्यालयों का कार्यभार दिया गया है। ऐसे में बागवान सरकार की सुविधाओं से महरूम हो रहे हैं। स्थानीय निवासी दर्शन सिंह, कुलदीप कुमार, चैन सिंह, लेख राज, टेक चंद, चमारू राम, बिहारी लाल, रूमाल सिंह, सुभाष कुमार, उत्तम, बिहारी, सुरेंद्र, रतन, हरि कृष्ण व प्रेम लाल ने बताया कि उद्यान केंद्र बंद होने के कारण उन्हें औजार, सेब व अन्य किस्म के पौधे लेने के लिए करीब 30 से 40 किलोमीटर दूर सलूणी जाना पड़ता है। इस कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। यही नहीं उद्यान केंद्र बंद होने के कारण उन्हें सरकार की ओर से बागवानों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि बेशक सरकार कृषि व बागवानी को बढ़ावा देने के दावे करती हो, लेकिन सलूणी क्षेत्र के लोगों को सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उनके दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अधिक्तर लोग कृषि व बागवानी पर निर्भर है। इसके बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा सकी हैं। उन्होंने सरकार व संबंधित विभाग से मांग की है कि सलूणी के उद्यान केंद्रों में स्टाफ की तैनाती की जाए व बंद पड़े केंद्रों को खोला जाए।
